शीतला माता

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शीतला माता की कथा

शीतलाष्टमी वैशाख मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी को शीतला देवी की पूजा को जाती है। शीतला देवी की पूजा चेचक निकलने के प्रकोप से बचने के लिए की जाती है। ऐसी प्राचीन मान्यता है कि जिस घर की महिलाएँ शुद्ध मन से इस व्रत को करती हैं उस परिवार को शीतला देवी धन-धान्य से पूर्ण एवं प्राकृतिक विपदाओ से दूर रखती है।
इस पर्व को बसौड़ा भी कहते हैं। बसौड़ा का अर्थ हैं बासी भोजन। इस दिन घर में ताजा भोजन नहीं बनाया जाता हैं। एक दिन पहले ही भोजन बनाकर रख देते हैं। शीतला देवी का पूजन करने के बाद घर के सब व्यक्ति बासी भोजन को खाते हैं। जिस घर में चेचक से कोई बीमार हो उसे यह व्रत नहीं करना चाहिए।

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