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बैसाखी खुशियों और नई शुरुआत का पर्व है। बैसाखी का दिन किसानों के लिए विशेष महत्व रखता है। बैसाखी आने तक रबी की फसल पक जाती है। ऐसे में किसान अपनी फसलों की कटाई की खुशी में बैसाखी मनाते हैं। इसके अलावा बैसाखी सूर्यदेव की स्तुति का भी विशेष दिन माना जाता है क्योंकि जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं, तो बैसाखी का पर्व मनाया जाता है। इस साल बैसाखी 13 अप्रैल, रविवार को है। बैसाखी को वैशाख संक्रांति नाम से भी जाना जाता है। आइए, विस्तार से जानते हैं बैसाखी की तिथि, मुहूर्त और पुण्यकल।
बैसाखी, वैशाख संक्रांति या मेष संक्रांति का महत्व
वैशाख संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा और दान का महत्व है। इसे नया साल मानते हैं। सूर्य देव को ग्रहों का राजा कहते हैं इसलिए उनके राशि बदलने का असर सब पर होता है। मेष संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा करने से जीवन में अच्छी ऊर्जा आती है। यह दिन किसानों के लिए खास है क्योंकि इस दिन फसल कटाई शुरू होती है। सूर्यदेव की स्तुति के साथ वैशाख संक्रांति पर भगवान शिव और देवी काली की पूजा भी की जाती है।